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अन्ना के गांव रालेगण सिद्धि की पांच तस्वीरें, देखिए

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भारत की निगाहें तेंडुलकर और द्रविड़ पर

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मासिक किस्तों में खरीदिए सोना आइये जाने !

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एप्पल को टक्कर देने के लिए सोनी ने उठाया कदम!

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Wednesday, September 7, 2011

आतंकियों ने कब-कब किया भारत को लहू-लुहान

सीमा खान । दिल्ली उच्च न्यायालय में धमाके ने एक बार फिर साबित कर दिया कि हम आज भी वहीं हैं जहां से चले थे। चंद महीने पहले ही दिल्ली उच्च न्यायालय में आतंकियों ने मामूली धमाके से शायद इसी धमाके के लिए पूर्व अभ्यास किया था।

दिल्ली उच्च न्यायालय परिसर में चार महीने पहले ही एक और धमाका हुआ था। दिल्ली उच्च न्यायालय में हुए इस बम धमाके को इंडियन मुजाहिदीन के आतंकियों ने अंजाम दिया था। इस धमाके का मास्टरमाइंड इंडियन मुजाहिदीन का आतंकी आमिर रजा खान था।

आइए देखते हैं, आतंकवादियों के इस आतंकी युद्ध ने कब-कब भारत को चोट पहुंचाई।

1993 के बाद से देश में आतंकी घटनाएं :

मार्च 12, 1993: मुंबई में एक साथ 13 सीरियल बम ब्लास्ट हुए। इस आतंकी घटना में 257 लोगों की मौत हुई, जबकि 700 लोग घायल हुए। इस घटना को दाऊद इब्राहीम की डी कंपनी ने अंजाम दिया।

फरवरी 14, 1998: कोयंबटूर में बम ब्लास्टः 11 जगहों पर हुए 13 बम धमाकों मे$ 46 लोगों की मौत, जबकि 200 घायल।

अक्टूबर 1, 2001: श्रीनगर में जम्मू-कश्मीर एसेंबली परिसर में आतंकी हमला। 35 लोगों की मौत। जैश-ए-मोहम्मद ने ली जिम्मेदारी।

दिसंबर 13, 2001: भारत की संसद पर आतंकी हमले में 12 लोगों की मौत, जबकि 18 लोग घायल। पाकिस्तान के आतंकी संगठनों को इसके लिए जिम्मेदार बताया गया।

सितंबर 24, 2002: गुजरात के अक्षरधाम मंदिर पर हमला। 31 लोगों की मौत, 79 घायल।

कब-कब बनी मुंबई आतंकवादियों का निशाना...


मई 14, 2002: जम्मू के पास आर्मी कैंट पर आतंकी हमला। 30 लोगों की मौत।

मार्च 13, 2003: मुंबई की लोकल ट्रेन में बम ब्लास्ट से 11 लोगों की मौत।

अगस्त 25, 2003: मुंबई में दोहरे कार धमाके में 52 लोगों की मौत, जबकि 150 लोग घायल।

अगस्त 15, 2004: भारत के उत्तर-पूर्वी राज्य असम में ब्लास्ट। 16 लोगों की मौत जिसमें ज्यादातर स्कूली बच्चे शामिल थे।

जुलाई 5, 2005: अयोध्या में बाबरी विध्वंस स्थल, राम जन्मभूमि पर आतंकी हमला।

अक्टूबर 29, 2005: दीवाली से दो दिन पहले दक्षिण दिल्ली के मशहूर बाजारों में जबरदस्त धमाका। 59 लोगों की मौत जबकि 200 घायल। पाकिस्तान के आतंकी संगठन इंकलाब महाज ने इस आतंकी हमले की जिम्मेदारी ली।

मार्च 7, 2006: तीर्थनगरी वाराणसी में हुए आतंकी हमले में 28 लोगों की जान गई। 101 लोग इस हमले में घायल हुए।

जुलाई 11, 2006: मुंबई की लाइफलाइन लोकल ट्रेनों में पूरी प्लानिंग के साथ 7 धमाके। इस हमले में 200 लोगों की मौत।

सितंबर 8, 2006: महाराष्ट्र के मालेगांव की एक मस्जिद के पास धमाके में 37 लोगों की मौत व 125 घायल। धमाकों के पीछे सिमी का हाथ।

मई 18, 2007: हैदराबाद की मक्का मस्जिद में शुक्रवार की नमाज के दौरान बम विस्फोट। 13 लोगों ने गंवाई जान। आतंकी हमले के बाद हुए दंगो में पुलिस की गोली से भी मारे गए 4 लोग।

मई 26, 2007: गुवाहाटी में हुए धमाके में 6 लोगों की मौत जबकि 30 लोग घायल।

जून 10, 2007: मणिपुर के बॉर्डर पर कई जगहों पर हुई फायरिंग से 11 लोगों की मौत।

अगस्त 25, 2007: हैदराबाद में हूजी के हमले में 42 लोगों की मौत व 50 घायल।

मई 13, 2008: पर्यटक स्थल जयपुर में 6 धमाके। 63 लोगों की मौत जबकि 150 लोग घायल।

जुलाई 25, 2008: बेंगलूरु में एक साथ 7 धमाके। एक की मौत जबकि 150 से ज्यादा घायल।

जुलाई 26, 2008: अहमदाबाद में सीरियल ब्लास्ट। 45 लोगों की मौत जबकि 150 लोग घायल। इंडियन मुजाहिद्दीन ने ली हमले की जिम्मेदारी।

सितंबर 13, 2008: दिल्ली के मशहूर शॉपिंग स्थलों पर 5 बम धमाकों से 21 लोगों की मौत जबकि 100 लोग घायल। इंडियन मुजाहिद्दीन ने ली हमले की जिम्मेदारी।

सितंबर 27, 2008: दिल्ली के फूल बाजार में धमाके से एक की मौत।

अक्टूबर, 30, 2008: असम में एक साथ 13 बम धमाके। 61 की मौत जबकि 300 घायल।

जुलाई 13, 2011: मुंबई में एक साथ तीन जगहों पर सीरियल बम ब्लास्ट। 20 लोगों की मौत जबकि 100 घायल।



आखिर हम कब जागेंगे इस पर आपकी प्रतिक्रिया के इंतज़ार में

 

दिल्ली बम धमाके में 11 की मौत, 76 घायल

सीमा खान : नई दिल्ली। गृहमंत्रालय के विशेष सचिव यू. के. बंसल ने कहा है कि दिल्ली उच्च न्यायालय के बाहर हुए बम धमाके में अब तक 11 लोगों की मौत हो चुकी है और और 76 लोग घायल हुए हैं, जिनमें से ज्यादातर को राम मनोहर लोहिया अस्तपताल में भर्ती करवाया गया है।

उन्होंने कहा कि इस बम धमाके की जांच एनआईए की एक टीम को सौंप दी गई है और सीएफएसल टीम फॉरेंसिक जानकारियां इकट्ठा कर रही है।

उन्होंने कहा कि अभी किसी भी नतीजे पर पहुंचना जल्दबाजी होगी।

वैसे उन्होंने कहा कि इस धमाके में पीईटीएन का इस्तेमाल किया गया है।

विशेष सचिव यू. के. बंसल ने कहा, धमाकों का कोई विशेष खुफिया इनपुट नहीं था।

इससे पहले –
चिदंबरम ने दिल्ली उच्च न्यायालय हुए धमाके को आतंकी हमला बताते हुए कहा कि इस संबंध में खुफिया जानकारी दिल्ली पुलिस को इसी साल जुलाई में दे दी गई थी।

चिदंबरम ने कहा कि यह हाई इंटेंसिटी ब्लास्ट था। गेट नंबर चार और पांच के बीच में रिसेप्शन काउंटर के पास बम एक सूटकेस में रखा गया था। उन्होंने कहा कि किसने इस धमाके को अंजाम दिया है उनके बारे में कोई जानकारी हासिल नहीं हो पाई है।

इससे पहले -
दिल्ली के अति संवेदनशील इलाके में स्थित दिल्ली उच्च न्यायालय के गेट नम्बर पांच के बाहर बुधवार सुबह एक विस्फोट में कम से कम दस लोग मारे गए और 65 घायल हो गए। यह जानकारी केंद्रीय गृह सचिव आर.के. सिंह ने दी।

दोपहर 12.30 बजे गृहमंत्री पी. चिदंबरम दिल्ली बम धमाके पर बयान दे सकते हैं।
गौरतलब है कि दिल्ली उच्च न्यायालय संसद भवन और राष्ट्रपति भवन से कुछ ही किलोमीटर दूरी पर है।

यह विस्फोट उच्च न्यायालय परिसर के गेट नम्बर पांच के बाहर सुबह करीब 10.30 बजे हुआ। उस समय वहां काफी भीड़भाड़ थी और न्यायालय परिसर में दाखिल होने की प्रतीक्षा कर रहे लोगों की लम्बी कतार लगी हुई थी।

सिंह ने संवाददाताओं को बताया, "विस्फोट में नौ लोग मारे गए हैं। सभी घायलों को अस्पताल पहुंचा दिया गया है। बम ब्रीफकेस में रखा गया था। हमें ब्रीफकेस के टुकड़े मिले हैं।"

सिंह ने बताया कि जांच दल मौके पर पहुंच चुके हैं। उन्होंने कहा, "राष्ट्रीय जांच एजेंसी की टीम पहुंच चुकी है। फोरेंसिक प्रयोगशालाओं के लोग मौके पर पहुंच चुके हैं। राष्ट्रीय सुरक्षा गार्ड की टीम सबूत जुटाने के लिए घटनास्थल पर मौजूद है।"

विशेष पुलिस आयुक्त (कानून एवं व्यवस्था) धर्मेद्र कुमार ने संवाददाताओं को बताया, "हमने पूरे इलाके की घेराबंदी कर दी है और लोगों से उस जगह इकट्ठा नहीं होने को कहा है।"

प्रत्यक्षदर्शियों का कहना है कि घायलों की संख्या 50 से 60 के करीब हो सकती है। भगवान दास नाम के एक प्रत्यक्षदर्शी ने बताया, "विस्फोट में कई लोग बुरी तरह जख्मी हुए हैं।" दिल्ली उच्च न्यायालय में चार महीनों के भीतर विस्फोट की यह दूसरी घटना है।
इससे पहले -
आज सुबह करीब 9.58 बजे दिल्ली हाइकोर्ट के परिसर में जोरदार बम बलास्ट हुआ है। धमाके में अब तक 9 लोगों की मौत हो चुकी है और करीब 45 लोगों के घायल होने की खबर है। बताया जा रहा है कि धमाके में कुछ वकील भी हताहत हुए हैं।

केंद्रीय गृह सचिव आर. के. सिंह के अनुसार अब तक 9 लोगों की मौत हो चुकी है और 45 लोग घायल हो चुके हैं।
उन्होंने कहा कि बम एक सूटकेस में रखा हुआ था, जिसके अवशेष भी मिले हैं।
यह धमाका उच्च न्यायालय के बाहर 10. 17 बजे हुआ।

धमाका गेट नम्बर 5 पांच पर रिसेप्शन पर हुआ है।

सभी घायलों को आरएमएल और सफदरजंग अस्पताल ले जाया गया है।

पुलिस ने इलाके की घेराबंदी कर ली है और अग्निशमन दल घटनास्थल पर पहुंच चुके हैं।

इसके अलावा फॉरेंसिक विशेषज्ञ और कई एम्ब्यूलेंस भी घटनास्थल पर पहुंचकर अपने काम अंजाम दे रहे हैं।

अनुमान लगाया जा रहा है कि लोग बुरी तरह से घायल हुए हैं यानी बम का काफी प्रभावशाली था।

पुलिस और गृहमंत्रालय ने अभी तक बम की प्रकृति के बारे में किसी तरह की जानकारी नहीं दी है।

एनआईए और एनएसजी के दलों को भी घटनास्थल रवाना कर दिया गया है।

दिल्ली भर में सुरक्षा चेतावनी जारी कर दी गई है।

दिल्ली पुलिस का कहना है कि घायलों की संख्या में इजाफा हो सकता है।

विभिन्न जांच एजेंसियां इस जांच में लगी हैं कि इस बम की प्रकृति क्या है।
एनएसजी के डीजी राजेन मधेकर ने कहा है कि अब तक हुई जांच के आधार पर हम कह सकते हैं कि इस बम में अमोनियम नाइट्रेट की भारी क्षमता के साथ ईआईडी का इस्तेमाल किया गया है।

राज्यसभा 2 बजे तक के लिए स्थगित कर दी गई है, ताकि सरकार बम धमाके पर जानकारी एकत्र कर सके और बयान दे सके।
दिल्ली उच्च न्यायालय के बाहर धमाके के बाद संसद भवन की सुरक्षा-व्यवस्था बढ़ा दी गई है। संसद के अंदर और बाहर की सुरक्षा अलर्ट कर दी गई है। पार्किंग में खोजी कुत्तों की मदद से सांसदों की गाड़ियों की जांच की जा रही है।

धमाके के बाद दिल्ली और मुंबई में हाई अलर्ट घोषित कर दिया गया है। पवन बंसल ने सदन को बताया कि दोपहर 12.30 बजे गृहमंत्री पी. चिदंबरम बयान दे सकते हैं।

वहीं, एनआईए की टीम धमाका स्थल पर पहुंच गई है। इस धमाके में राममनोहर लोहिया में भर्ती 45 घायलों में 9 लोगों की मौत हो गई है।
आरएमएल अस्पताल के हेल्पलाइन नम्बर 011-23348200, 23404446, 23743769, 23404478, राममनोहर लोहिया अस्पताल- 011-23744721, 011-23365525 और सफदरजंग के 011-26101925, 26161960, 26194690, 011-26707444 हैं।



 

Friday, September 2, 2011

इसलिए हैं गणेशजी आद्य-पूजनीय

.सीमा खान : प्रथम पूज्य भगवान गणपति का जन्म पर्व गणेश चतुर्थी आज देश भर में मनाई जा रही है। गणेश जी को मनाने के लिए भक्तगण पलक पावडे बिछाए हुए है। इस दौरान मंदिर-मंदिर, घर-घर और द्वार-द्वार पर गणेश जी की पूजा अर्चना की जा रही है। बाजारों में आज सुबह से गुड धाणी, पुजन सामग्री, दूर्वा, फूल माला व डंकों की विशेष खरीदारी हो रही है। विश्व हिन्दू धर्म और संस्कृति को मानने वाले प्रत्येक व्यक्ति के मानस में यह पद रच बस गया है कि कोई भी कार्य प्रारम्भ करने से पूर्व मुंह से निकल ही जाता है कि "आइए श्रीगणेश किया जाए"। शिव पार्वती के इस पुत्र की ऎसी क्या महानता है कि उन्हें आद्य-पूजनीय माना जाता है,आज इस बिन्दु पर कुछ विचार किया जाए। पौराणिक कथा है कि माता-पिता के परम भक्त श्रीगणेश थे। एक बार सभी देवगण अपने वाहनों के शक्ति परीक्षण के लिए एकत्र हुए परन्तु गणेशजी असमंजस में थे क्योंकि परीक्षा इस बात की थी कि सम्पूर्ण ब्रम्हाण्ड की परिक्रमा सर्वप्रथम कौन पूरी करेगाक् छोटे से मूषक के साथ यह कैसे संभव होगाक् दौ़ड आरंभ होते ही अति बुद्धिमान गणेशजी ने शिव-पार्वतीजी को प्रणाम कर उन्हीं की प्रदक्षिणा की और प्रतियोगिता में प्रथम आए। उन्होंने इसके पीछे तर्क यह दिया कि माता-पिता मूर्तिमान ब्रम्हाण्ड है तथा उनमें ही सभी तीर्थो का वास है। साथ ही यदि वे माता-पिता स्वयं त्रिपुरारि शिवजी तथा माता-पार्वती हों तो कहना ही क्या है।
सम्पूर्ण देव मंडल उनके इस उत्तर पर साधु-साधु कह उठा तथा उन्हें अपने माता-पिता से "सभी पूजाओं/ विधि विधानों में आद्य पूजन" होने का वरदान मिला। यह उनके बुद्धि कौशल के आधार पर अर्जित वरदान था। स्पष्ट है कि श्रीगणेश की पूजा से आरम्भ की गई विधि में कोई बाधा नहीं आती क्योंकि वे अपने बुद्धि-चातुर्य से प्रत्येक बाधा का शमन कर देते हैं। श्रीगणेश की स्थापना कार्य-विधि के सफल होने की निश्चित गारंटी बन जाती है।
इस कथा से न केवल गणेशजी के बुद्धि कौशल का परिचय मिलता है, बल्कि उनकी अनन्य मातृ-पितृ भक्ति का भी प्रमाण मिलता है। श्रीगणेश के माहात्म्य को दर्शाने वाली अनेक पौराणिक कथाएं वैदिक साहित्य में उपलब्ध हैं। महर्षि वेद-व्यास को जब "महाभारत" की कथा को लिपिबद्ध करने का विचार आया तो आदि देव ब्रम्हाजी ने परम विद्वान श्रीगणेश के नाम का प्रस्ताव रखा। इस पर उनके द्वारा यह शर्त रखी गई कि वे कथा तब लिखेंगे, जब लेखन के समय उनकी लेखनी को विराम न करना प़डे। इससे पूर्व समस्त आर्ष-साहित्य परम्परागत पद्धति से कंठस्थ किया जाता था परन्तु "जय संहिता" जो "महाभारत" कहलाई, प्रथम लिपिबद्ध कथा है अत: स्पष्ट है कि आर्ष साहित्य में लेखन की परम्परा के प्रारम्भकर्ता पार्वती पुत्र ही हैं।
भाद्रपद मास के, शुक्ल पक्ष के, चंद्रमा के दर्शन करने वाले पर चोरी का कलंक लगता है। श्रीकृष्ण भी इससे प्रभावित हुए, ऎसा लोकमत मे प्रचलित है परन्तु यदि त्रुटिवश ऎसा हो जाए तो उसका निदान भी विƒनेश्वर के पास है। कहते हैं कि श्रीगणेश का बारह नामों से पूजन करने से इस कलंक से रक्षा हो जाती है। मैं यह भी बता दूं कि यह स्वत: अनुभूत अनुभव भी है। जिस देवता के नाम से पूजन करने मात्र से ऎसे कलंक से रक्षा हो जाती है, जिससे स्वयं पीताम्बरधारी श्रीकृष्ण भी नहीं बच सके, उसकी महत्ता, अनुमान इसी तथ्य से लगाया जा सकता है।
किसी व्यक्ति की कुंडली में यदि बुध अथवा राहु की दशा/अन्तर्दशा से पी़डा हो तो श्रीगणेशजी का पूजन उसके निदान हेतु बताया जाता है। "ú गं गणपतये नम:" के जाप के साथ 108दूर्वा तृण उनके चरणों में अर्पित करने से बुध और राहु की दशा/अन्तर्दशा की पी़डा से शांति मिलती है। ये दोनों ही ग्रह व्यक्ति की कुंडली में यदि दुर्बल स्थिति में हों तो घोर मानसिक पी़डा देते हैं तथा बाधाएं उत्पन्न करते हैं। राहु की दशा प्राय: व्यक्ति को घोर विभ्रम की अवस्था में डाल देती है। बुध की दशा/अन्तर्दशा में विशेष रूप से यदि गुरू से संबंधित हो तो "लेखनी की त्रुटि" के कारण मानसिक परेशानियां आती हैं। ऎसे में पुन: श्रीगणेशजी की पूजा ही मानसिक कष्टों और बाधाओं से मुक्ति तथा शांति दिलाती है।
भारतीय धार्मिक साहित्य में जहां गणेशजी को कार्य के शुभारम्भ तथा बाधाओं के प्रशमन का गुरूतर भार सौंपा गया है, वहीं उनके व्यक्तित्व का दूसरा पक्ष यह है कि उनके संबंध मे बाल-सुलभ चंचलता, अत्यधिक भोजन तथा अन्य देवी-देवताओं के लिए समस्या पैदा करने वाली अनेक कथाएं मिलती हैं। उत्तर भारत में "करवा-चौथ" पर गणेश पूजा अखंड सौभाग्य के लिए की जाती है। साथ ही दादी-नानी के मुंह से चुटुक विनायक की कथा भी सुनने को मिलती है, जिसमें विनायक गणेश निर्धन बुढि़या का घर धन सम्पदा से भर देते हैं। घर की ब़डी बूढि़यों के झुर्री भरे चेहरों पर, यह कथा को सुनाते समय जो चमक आती है और इसके अन्त में जो आशीर्वचन- जैसे इसके दिन फिरे- वैसे सबके दिन फिरे- वो देती हैं, उसका आनन्द गूंगे के गु़ड के समान है। पुन: दीपावली पर लक्ष्मी-गणेश के पूजन से ही पर्व की शुरूआत होती है। व्यापारी वर्ग विशेष रूप से अपने आने वाले वित्तीय वर्ष में समृद्धि की कामना से मां महालक्ष्मी के साथ गंगाजल की पूजा करते हैं। महाराष्ट्र में गणपति पूजन के समय जनमानस का उत्साह देखते ही बनता है। राष्ट्र 1857 के प्रथम स्वतंत्रता संग्राम की असफलता के बाद घोर अवसाद में था, तब लोकमान्य बालगंगाधर तिलक ने सन 1892/93 में पहले गणपति पूजन और फिर शिवाजी जयन्ती को सार्वजनिक उत्सव के रूप मनाना आरम्भ किया। श्रीगणेश जनमानस के देवता थे। उनके पूजन के नाम पर जनता में उत्साह जाग्रत हुआ तथा उसे ही तिलकजी ने राष्ट्रीय आंदोलन की मुख्य धारा से जो़ड दिया। ब्रिटिश सरकार की नजरों से बचकर यह जन जागरण का सैलाब श्री गणेश के कारण ही उम़डा और अंतत: भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन के इतिहास का महत्वपूर्ण अंग बन गया। आज भी गरीबी, बाढ़, भी़ड, बेरोजगारी आदि समस्याओं के बीच लेजिम और ढोल की थाप पर नाचते हुए मुम्बईकर गणेशमय हो जाते हैं और दस दिन तक सभी लौकिक चिंताओं से दूर हो जाते हैं।
यह गणेशजी का ही प्रभाव है कि सम्पूर्ण महाराष्ट्र, विशेष रूप से मुम्बई धर्म सम्प्रदाय, जाति, भाषा और क्षेत्र की विविधताओं से ऊपर उठकर "गणपति बप्पा" के स्वागत सत्कार में लग जाता है। गणपति बप्पा मोरिया- आला अरसी सावडिया के नारों से गणपति की विदाई भी कुछ कम मार्मिक नहीं होती। भूख-प्यास, आधि-व्याधि, गरीबी-परेशानी सब भूलकर लोग दस दिन के लिए श्रीगणपति की आराधना में समाधिस्थ हो जाते हैं। निश्चय ही श्रीगणेश से अधिक लोकमानस को प्रभावित करने वाला कोई देवता नहीं है। मुम्बई में लाल बाग के बादशाह की विशेष महत्ता है। साथ ही सिद्धि विनायक तो विराजमान हैं ही।
कभी आप इस बात पर ध्यान दें कि श्री अमरनाथजी की पवित्र गुफा से लेकर रामनरेश महादेव तथा मां कामाख्या देवी से लेकर सोमनाथजी तक प्रत्येक मंदिर में प्रवेश से पूर्व श्री गणेश विराजमान रहते हैं। श्रद्धालु को जब गणेशजी के दर्शन होते हैं तो अपने आराध्य देव के दर्शन की आशा से उसका मन उल्फुल्लित हो जाता है और अपनी सारी थकान भूल जाता है। ऎसी महिमा गजानन की है इसीलिए चाहे मोतीडूंगरी के गणेश हों या मुम्बई के सिद्धि विनायक अथवा देश में स्थापित गणेशजी की अन्य सिद्ध पीठ, सदैव से ही भक्तों की कामनाओं को पूर्ण करने के कारण भक्तजनों की श्रद्धा का केन्द्र बने रहते हैं।
मां पार्वती तथा देवाधिदेव महादेव के प्रिय पुत्र श्रीगणेश की कृपा के बिना कोई कार्य सिद्ध नहीं होता इसीलिए पूजन के अंत मे आशीर्वचन के रूप मे पंडित जी यह मंगल कामना करते हैं कि "यान्तु देवगणा: सर्वे।" अर्थात् सभी देवी देवता, जिन्हें पूजन के लिए आमंत्रित किया गया था, अपने-अपने स्थानों को पधारें तथा मंगल कार्य होने पर उन्हें फिर बुलाया जाएगा परन्तु लक्ष्मी-गणेश एवं ऋद्धि-सिद्धि यहीं विराजमान रहें। स्पष्ट है कि माता लक्ष्मी और श्रीगणेश अपनी सहधर्मिणी ऋद्धि-सिद्धि के साथ जब कृपा करते हैं तभी मानव का लौकिक तथा परलौकिक जीवन सफल हो पाता है। श्रीगणेश की महिमा को लिपिबद्ध करने में मेरी अल्पबुद्धि स्वयं को असमर्थ पाती है अत: इस निवेदन के साथ कि श्रीगणेशजी सभी का कल्याण करें- लेखनी को विराम दे रही हू ।

ब्लॉगर के लिए लोकप्रिय एनीमेशन विजेट

सीमा खान : पेश है ब्लॉगर के लिए लोकप्रिय एनीमेशन  विजेट इस में  एनीमेशन का उपयोग किया गया है इस विजेट को बहुत आसानी से तीन कदमो में अपने ब्लॉग पर लगाया जा सकता है.
इस बिजेट  को ब्लॉग पर लाने के लिए नीचे बताई प्रक्रिया देखे Blogger

Layout
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* (यदि आप पहले से ही इस गैजेट का प्रयोग कर रहे है तो  इस कदम को छोड़ दे )
    * के बाद आप लोकप्रिय पोस्ट गैजेट "गैजेट जोड़ें"और फिर "HTML / Javascript" का चयन करें
    * एचटीएमएल / जावास्क्रिप्ट गैजेट के "सामग्री" के लिए सभी स्क्रिप्ट में बॉक्स में रखे .
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अब नीचे दिया कोड खुले बॉक्स में डाले 

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 अब परिवर्तन को सेब कर दे

एप्पल को टक्कर देने के लिए सोनी ने उठाया कदम!

By सीमा खान
टैबलेट कंप्यूटर के बाजार में एप्प्ल और सैमसंग जैसे बड़े खिलाड़ियों को टक्कर देने के लिए अब सोनी ने भी अपना नया टैबलेट कंप्यूटर- ‘टेबलेट एस’ पेश कर दिया है। इसके जरिए कंपनी एप्पल के आईपैड 2 और सैमसंग टैब को चुनौती देगी

सोनी टैबलेट एस में डब्ल्यूएक्सजीए टेक्नोलॉजी से लैस, 9.4 इंच का स्क्रीन लगा हुआ है। ऑपरेटिंग सिस्टम के तौर पर इसमें हनीकॉम्ब 3.1 का इस्तेमाल किया गया है। साथ ही इसमें 1 गीगाहर्ट्ज के टैगरा 2 जैसे दमदार प्रोसेसर को लगाया गया है। अन्य फीचर्स की बात की जाए तो इसमें वाई फाई, इन्फ्रा रेड, ब्लूटुथ, डिजिटल कंपास और लाइट सेंसर जैसे एडवांस फीचर को शामिल किया गया है।


ग्राहकों के लिए सोनी का यह टैबलेट 16 जीबी और 32 जीबी की मैमोरी विकल्प के साथ उपलब्ध होगा। इसका वजन मात्र 598 ग्राम है, यानी यह एप्पल के आईपैड 2 के मुकाबले हल्का है। कंपनी की तरफ से यह दावा भी किया जा रहा है कि एक बार चार्ज करने के बाद इसे 8 घंटे तक इस्तेमाल किया जा सकता है, यानी इसका बैट्री बैक-अप भी काफी अच्छा है।


लेकिन जानकार सोनी के इस नए प्रोडक्ट को आईपैड 2 के लिए बहुत बड़ी चुनौती की तरह नहीं देख रहे हैं।


सोनी टैबलेट एस की प्री-बुकिंग शुरू की जा चुकी है। इसके 16 जीबी मैमोरी वाले मॉडल की कीमत 500 डॉलर यानी करीब 22500 रुपए रखी गई है। कंपनी की तरफ से सितंबर महीने के मध्य तक इसकी शिपिंग शुरू कर दी जाएगी।