मूवी रिव्यू: बॉडीगार्ड

Go to Blogger edit html and find these sentences.Now replace these sentences with your own descriptions.

अन्ना के गांव रालेगण सिद्धि की पांच तस्वीरें, देखिए

Go to Blogger edit html and find these sentences.Now replace these sentences with your own descriptions.

भारत की निगाहें तेंडुलकर और द्रविड़ पर

Go to Blogger edit html and find these sentences.Now replace these sentences with your own descriptions.

मासिक किस्तों में खरीदिए सोना आइये जाने !

Go to Blogger edit html and find these sentences.Now replace these sentences with your own descriptions.

एप्पल को टक्कर देने के लिए सोनी ने उठाया कदम!

Go to Blogger edit html and find these sentences.Now replace these sentences with your own descriptions.

Wednesday, September 7, 2011

आतंकियों ने कब-कब किया भारत को लहू-लुहान

सीमा खान । दिल्ली उच्च न्यायालय में धमाके ने एक बार फिर साबित कर दिया कि हम आज भी वहीं हैं जहां से चले थे। चंद महीने पहले ही दिल्ली उच्च न्यायालय में आतंकियों ने मामूली धमाके से शायद इसी धमाके के लिए पूर्व अभ्यास किया था।

दिल्ली उच्च न्यायालय परिसर में चार महीने पहले ही एक और धमाका हुआ था। दिल्ली उच्च न्यायालय में हुए इस बम धमाके को इंडियन मुजाहिदीन के आतंकियों ने अंजाम दिया था। इस धमाके का मास्टरमाइंड इंडियन मुजाहिदीन का आतंकी आमिर रजा खान था।

आइए देखते हैं, आतंकवादियों के इस आतंकी युद्ध ने कब-कब भारत को चोट पहुंचाई।

1993 के बाद से देश में आतंकी घटनाएं :

मार्च 12, 1993: मुंबई में एक साथ 13 सीरियल बम ब्लास्ट हुए। इस आतंकी घटना में 257 लोगों की मौत हुई, जबकि 700 लोग घायल हुए। इस घटना को दाऊद इब्राहीम की डी कंपनी ने अंजाम दिया।

फरवरी 14, 1998: कोयंबटूर में बम ब्लास्टः 11 जगहों पर हुए 13 बम धमाकों मे$ 46 लोगों की मौत, जबकि 200 घायल।

अक्टूबर 1, 2001: श्रीनगर में जम्मू-कश्मीर एसेंबली परिसर में आतंकी हमला। 35 लोगों की मौत। जैश-ए-मोहम्मद ने ली जिम्मेदारी।

दिसंबर 13, 2001: भारत की संसद पर आतंकी हमले में 12 लोगों की मौत, जबकि 18 लोग घायल। पाकिस्तान के आतंकी संगठनों को इसके लिए जिम्मेदार बताया गया।

सितंबर 24, 2002: गुजरात के अक्षरधाम मंदिर पर हमला। 31 लोगों की मौत, 79 घायल।

कब-कब बनी मुंबई आतंकवादियों का निशाना...


मई 14, 2002: जम्मू के पास आर्मी कैंट पर आतंकी हमला। 30 लोगों की मौत।

मार्च 13, 2003: मुंबई की लोकल ट्रेन में बम ब्लास्ट से 11 लोगों की मौत।

अगस्त 25, 2003: मुंबई में दोहरे कार धमाके में 52 लोगों की मौत, जबकि 150 लोग घायल।

अगस्त 15, 2004: भारत के उत्तर-पूर्वी राज्य असम में ब्लास्ट। 16 लोगों की मौत जिसमें ज्यादातर स्कूली बच्चे शामिल थे।

जुलाई 5, 2005: अयोध्या में बाबरी विध्वंस स्थल, राम जन्मभूमि पर आतंकी हमला।

अक्टूबर 29, 2005: दीवाली से दो दिन पहले दक्षिण दिल्ली के मशहूर बाजारों में जबरदस्त धमाका। 59 लोगों की मौत जबकि 200 घायल। पाकिस्तान के आतंकी संगठन इंकलाब महाज ने इस आतंकी हमले की जिम्मेदारी ली।

मार्च 7, 2006: तीर्थनगरी वाराणसी में हुए आतंकी हमले में 28 लोगों की जान गई। 101 लोग इस हमले में घायल हुए।

जुलाई 11, 2006: मुंबई की लाइफलाइन लोकल ट्रेनों में पूरी प्लानिंग के साथ 7 धमाके। इस हमले में 200 लोगों की मौत।

सितंबर 8, 2006: महाराष्ट्र के मालेगांव की एक मस्जिद के पास धमाके में 37 लोगों की मौत व 125 घायल। धमाकों के पीछे सिमी का हाथ।

मई 18, 2007: हैदराबाद की मक्का मस्जिद में शुक्रवार की नमाज के दौरान बम विस्फोट। 13 लोगों ने गंवाई जान। आतंकी हमले के बाद हुए दंगो में पुलिस की गोली से भी मारे गए 4 लोग।

मई 26, 2007: गुवाहाटी में हुए धमाके में 6 लोगों की मौत जबकि 30 लोग घायल।

जून 10, 2007: मणिपुर के बॉर्डर पर कई जगहों पर हुई फायरिंग से 11 लोगों की मौत।

अगस्त 25, 2007: हैदराबाद में हूजी के हमले में 42 लोगों की मौत व 50 घायल।

मई 13, 2008: पर्यटक स्थल जयपुर में 6 धमाके। 63 लोगों की मौत जबकि 150 लोग घायल।

जुलाई 25, 2008: बेंगलूरु में एक साथ 7 धमाके। एक की मौत जबकि 150 से ज्यादा घायल।

जुलाई 26, 2008: अहमदाबाद में सीरियल ब्लास्ट। 45 लोगों की मौत जबकि 150 लोग घायल। इंडियन मुजाहिद्दीन ने ली हमले की जिम्मेदारी।

सितंबर 13, 2008: दिल्ली के मशहूर शॉपिंग स्थलों पर 5 बम धमाकों से 21 लोगों की मौत जबकि 100 लोग घायल। इंडियन मुजाहिद्दीन ने ली हमले की जिम्मेदारी।

सितंबर 27, 2008: दिल्ली के फूल बाजार में धमाके से एक की मौत।

अक्टूबर, 30, 2008: असम में एक साथ 13 बम धमाके। 61 की मौत जबकि 300 घायल।

जुलाई 13, 2011: मुंबई में एक साथ तीन जगहों पर सीरियल बम ब्लास्ट। 20 लोगों की मौत जबकि 100 घायल।



आखिर हम कब जागेंगे इस पर आपकी प्रतिक्रिया के इंतज़ार में

 

दिल्ली बम धमाके में 11 की मौत, 76 घायल

सीमा खान : नई दिल्ली। गृहमंत्रालय के विशेष सचिव यू. के. बंसल ने कहा है कि दिल्ली उच्च न्यायालय के बाहर हुए बम धमाके में अब तक 11 लोगों की मौत हो चुकी है और और 76 लोग घायल हुए हैं, जिनमें से ज्यादातर को राम मनोहर लोहिया अस्तपताल में भर्ती करवाया गया है।

उन्होंने कहा कि इस बम धमाके की जांच एनआईए की एक टीम को सौंप दी गई है और सीएफएसल टीम फॉरेंसिक जानकारियां इकट्ठा कर रही है।

उन्होंने कहा कि अभी किसी भी नतीजे पर पहुंचना जल्दबाजी होगी।

वैसे उन्होंने कहा कि इस धमाके में पीईटीएन का इस्तेमाल किया गया है।

विशेष सचिव यू. के. बंसल ने कहा, धमाकों का कोई विशेष खुफिया इनपुट नहीं था।

इससे पहले –
चिदंबरम ने दिल्ली उच्च न्यायालय हुए धमाके को आतंकी हमला बताते हुए कहा कि इस संबंध में खुफिया जानकारी दिल्ली पुलिस को इसी साल जुलाई में दे दी गई थी।

चिदंबरम ने कहा कि यह हाई इंटेंसिटी ब्लास्ट था। गेट नंबर चार और पांच के बीच में रिसेप्शन काउंटर के पास बम एक सूटकेस में रखा गया था। उन्होंने कहा कि किसने इस धमाके को अंजाम दिया है उनके बारे में कोई जानकारी हासिल नहीं हो पाई है।

इससे पहले -
दिल्ली के अति संवेदनशील इलाके में स्थित दिल्ली उच्च न्यायालय के गेट नम्बर पांच के बाहर बुधवार सुबह एक विस्फोट में कम से कम दस लोग मारे गए और 65 घायल हो गए। यह जानकारी केंद्रीय गृह सचिव आर.के. सिंह ने दी।

दोपहर 12.30 बजे गृहमंत्री पी. चिदंबरम दिल्ली बम धमाके पर बयान दे सकते हैं।
गौरतलब है कि दिल्ली उच्च न्यायालय संसद भवन और राष्ट्रपति भवन से कुछ ही किलोमीटर दूरी पर है।

यह विस्फोट उच्च न्यायालय परिसर के गेट नम्बर पांच के बाहर सुबह करीब 10.30 बजे हुआ। उस समय वहां काफी भीड़भाड़ थी और न्यायालय परिसर में दाखिल होने की प्रतीक्षा कर रहे लोगों की लम्बी कतार लगी हुई थी।

सिंह ने संवाददाताओं को बताया, "विस्फोट में नौ लोग मारे गए हैं। सभी घायलों को अस्पताल पहुंचा दिया गया है। बम ब्रीफकेस में रखा गया था। हमें ब्रीफकेस के टुकड़े मिले हैं।"

सिंह ने बताया कि जांच दल मौके पर पहुंच चुके हैं। उन्होंने कहा, "राष्ट्रीय जांच एजेंसी की टीम पहुंच चुकी है। फोरेंसिक प्रयोगशालाओं के लोग मौके पर पहुंच चुके हैं। राष्ट्रीय सुरक्षा गार्ड की टीम सबूत जुटाने के लिए घटनास्थल पर मौजूद है।"

विशेष पुलिस आयुक्त (कानून एवं व्यवस्था) धर्मेद्र कुमार ने संवाददाताओं को बताया, "हमने पूरे इलाके की घेराबंदी कर दी है और लोगों से उस जगह इकट्ठा नहीं होने को कहा है।"

प्रत्यक्षदर्शियों का कहना है कि घायलों की संख्या 50 से 60 के करीब हो सकती है। भगवान दास नाम के एक प्रत्यक्षदर्शी ने बताया, "विस्फोट में कई लोग बुरी तरह जख्मी हुए हैं।" दिल्ली उच्च न्यायालय में चार महीनों के भीतर विस्फोट की यह दूसरी घटना है।
इससे पहले -
आज सुबह करीब 9.58 बजे दिल्ली हाइकोर्ट के परिसर में जोरदार बम बलास्ट हुआ है। धमाके में अब तक 9 लोगों की मौत हो चुकी है और करीब 45 लोगों के घायल होने की खबर है। बताया जा रहा है कि धमाके में कुछ वकील भी हताहत हुए हैं।

केंद्रीय गृह सचिव आर. के. सिंह के अनुसार अब तक 9 लोगों की मौत हो चुकी है और 45 लोग घायल हो चुके हैं।
उन्होंने कहा कि बम एक सूटकेस में रखा हुआ था, जिसके अवशेष भी मिले हैं।
यह धमाका उच्च न्यायालय के बाहर 10. 17 बजे हुआ।

धमाका गेट नम्बर 5 पांच पर रिसेप्शन पर हुआ है।

सभी घायलों को आरएमएल और सफदरजंग अस्पताल ले जाया गया है।

पुलिस ने इलाके की घेराबंदी कर ली है और अग्निशमन दल घटनास्थल पर पहुंच चुके हैं।

इसके अलावा फॉरेंसिक विशेषज्ञ और कई एम्ब्यूलेंस भी घटनास्थल पर पहुंचकर अपने काम अंजाम दे रहे हैं।

अनुमान लगाया जा रहा है कि लोग बुरी तरह से घायल हुए हैं यानी बम का काफी प्रभावशाली था।

पुलिस और गृहमंत्रालय ने अभी तक बम की प्रकृति के बारे में किसी तरह की जानकारी नहीं दी है।

एनआईए और एनएसजी के दलों को भी घटनास्थल रवाना कर दिया गया है।

दिल्ली भर में सुरक्षा चेतावनी जारी कर दी गई है।

दिल्ली पुलिस का कहना है कि घायलों की संख्या में इजाफा हो सकता है।

विभिन्न जांच एजेंसियां इस जांच में लगी हैं कि इस बम की प्रकृति क्या है।
एनएसजी के डीजी राजेन मधेकर ने कहा है कि अब तक हुई जांच के आधार पर हम कह सकते हैं कि इस बम में अमोनियम नाइट्रेट की भारी क्षमता के साथ ईआईडी का इस्तेमाल किया गया है।

राज्यसभा 2 बजे तक के लिए स्थगित कर दी गई है, ताकि सरकार बम धमाके पर जानकारी एकत्र कर सके और बयान दे सके।
दिल्ली उच्च न्यायालय के बाहर धमाके के बाद संसद भवन की सुरक्षा-व्यवस्था बढ़ा दी गई है। संसद के अंदर और बाहर की सुरक्षा अलर्ट कर दी गई है। पार्किंग में खोजी कुत्तों की मदद से सांसदों की गाड़ियों की जांच की जा रही है।

धमाके के बाद दिल्ली और मुंबई में हाई अलर्ट घोषित कर दिया गया है। पवन बंसल ने सदन को बताया कि दोपहर 12.30 बजे गृहमंत्री पी. चिदंबरम बयान दे सकते हैं।

वहीं, एनआईए की टीम धमाका स्थल पर पहुंच गई है। इस धमाके में राममनोहर लोहिया में भर्ती 45 घायलों में 9 लोगों की मौत हो गई है।
आरएमएल अस्पताल के हेल्पलाइन नम्बर 011-23348200, 23404446, 23743769, 23404478, राममनोहर लोहिया अस्पताल- 011-23744721, 011-23365525 और सफदरजंग के 011-26101925, 26161960, 26194690, 011-26707444 हैं।



 

Friday, September 2, 2011

इसलिए हैं गणेशजी आद्य-पूजनीय

.सीमा खान : प्रथम पूज्य भगवान गणपति का जन्म पर्व गणेश चतुर्थी आज देश भर में मनाई जा रही है। गणेश जी को मनाने के लिए भक्तगण पलक पावडे बिछाए हुए है। इस दौरान मंदिर-मंदिर, घर-घर और द्वार-द्वार पर गणेश जी की पूजा अर्चना की जा रही है। बाजारों में आज सुबह से गुड धाणी, पुजन सामग्री, दूर्वा, फूल माला व डंकों की विशेष खरीदारी हो रही है। विश्व हिन्दू धर्म और संस्कृति को मानने वाले प्रत्येक व्यक्ति के मानस में यह पद रच बस गया है कि कोई भी कार्य प्रारम्भ करने से पूर्व मुंह से निकल ही जाता है कि "आइए श्रीगणेश किया जाए"। शिव पार्वती के इस पुत्र की ऎसी क्या महानता है कि उन्हें आद्य-पूजनीय माना जाता है,आज इस बिन्दु पर कुछ विचार किया जाए। पौराणिक कथा है कि माता-पिता के परम भक्त श्रीगणेश थे। एक बार सभी देवगण अपने वाहनों के शक्ति परीक्षण के लिए एकत्र हुए परन्तु गणेशजी असमंजस में थे क्योंकि परीक्षा इस बात की थी कि सम्पूर्ण ब्रम्हाण्ड की परिक्रमा सर्वप्रथम कौन पूरी करेगाक् छोटे से मूषक के साथ यह कैसे संभव होगाक् दौ़ड आरंभ होते ही अति बुद्धिमान गणेशजी ने शिव-पार्वतीजी को प्रणाम कर उन्हीं की प्रदक्षिणा की और प्रतियोगिता में प्रथम आए। उन्होंने इसके पीछे तर्क यह दिया कि माता-पिता मूर्तिमान ब्रम्हाण्ड है तथा उनमें ही सभी तीर्थो का वास है। साथ ही यदि वे माता-पिता स्वयं त्रिपुरारि शिवजी तथा माता-पार्वती हों तो कहना ही क्या है।
सम्पूर्ण देव मंडल उनके इस उत्तर पर साधु-साधु कह उठा तथा उन्हें अपने माता-पिता से "सभी पूजाओं/ विधि विधानों में आद्य पूजन" होने का वरदान मिला। यह उनके बुद्धि कौशल के आधार पर अर्जित वरदान था। स्पष्ट है कि श्रीगणेश की पूजा से आरम्भ की गई विधि में कोई बाधा नहीं आती क्योंकि वे अपने बुद्धि-चातुर्य से प्रत्येक बाधा का शमन कर देते हैं। श्रीगणेश की स्थापना कार्य-विधि के सफल होने की निश्चित गारंटी बन जाती है।
इस कथा से न केवल गणेशजी के बुद्धि कौशल का परिचय मिलता है, बल्कि उनकी अनन्य मातृ-पितृ भक्ति का भी प्रमाण मिलता है। श्रीगणेश के माहात्म्य को दर्शाने वाली अनेक पौराणिक कथाएं वैदिक साहित्य में उपलब्ध हैं। महर्षि वेद-व्यास को जब "महाभारत" की कथा को लिपिबद्ध करने का विचार आया तो आदि देव ब्रम्हाजी ने परम विद्वान श्रीगणेश के नाम का प्रस्ताव रखा। इस पर उनके द्वारा यह शर्त रखी गई कि वे कथा तब लिखेंगे, जब लेखन के समय उनकी लेखनी को विराम न करना प़डे। इससे पूर्व समस्त आर्ष-साहित्य परम्परागत पद्धति से कंठस्थ किया जाता था परन्तु "जय संहिता" जो "महाभारत" कहलाई, प्रथम लिपिबद्ध कथा है अत: स्पष्ट है कि आर्ष साहित्य में लेखन की परम्परा के प्रारम्भकर्ता पार्वती पुत्र ही हैं।
भाद्रपद मास के, शुक्ल पक्ष के, चंद्रमा के दर्शन करने वाले पर चोरी का कलंक लगता है। श्रीकृष्ण भी इससे प्रभावित हुए, ऎसा लोकमत मे प्रचलित है परन्तु यदि त्रुटिवश ऎसा हो जाए तो उसका निदान भी विƒनेश्वर के पास है। कहते हैं कि श्रीगणेश का बारह नामों से पूजन करने से इस कलंक से रक्षा हो जाती है। मैं यह भी बता दूं कि यह स्वत: अनुभूत अनुभव भी है। जिस देवता के नाम से पूजन करने मात्र से ऎसे कलंक से रक्षा हो जाती है, जिससे स्वयं पीताम्बरधारी श्रीकृष्ण भी नहीं बच सके, उसकी महत्ता, अनुमान इसी तथ्य से लगाया जा सकता है।
किसी व्यक्ति की कुंडली में यदि बुध अथवा राहु की दशा/अन्तर्दशा से पी़डा हो तो श्रीगणेशजी का पूजन उसके निदान हेतु बताया जाता है। "ú गं गणपतये नम:" के जाप के साथ 108दूर्वा तृण उनके चरणों में अर्पित करने से बुध और राहु की दशा/अन्तर्दशा की पी़डा से शांति मिलती है। ये दोनों ही ग्रह व्यक्ति की कुंडली में यदि दुर्बल स्थिति में हों तो घोर मानसिक पी़डा देते हैं तथा बाधाएं उत्पन्न करते हैं। राहु की दशा प्राय: व्यक्ति को घोर विभ्रम की अवस्था में डाल देती है। बुध की दशा/अन्तर्दशा में विशेष रूप से यदि गुरू से संबंधित हो तो "लेखनी की त्रुटि" के कारण मानसिक परेशानियां आती हैं। ऎसे में पुन: श्रीगणेशजी की पूजा ही मानसिक कष्टों और बाधाओं से मुक्ति तथा शांति दिलाती है।
भारतीय धार्मिक साहित्य में जहां गणेशजी को कार्य के शुभारम्भ तथा बाधाओं के प्रशमन का गुरूतर भार सौंपा गया है, वहीं उनके व्यक्तित्व का दूसरा पक्ष यह है कि उनके संबंध मे बाल-सुलभ चंचलता, अत्यधिक भोजन तथा अन्य देवी-देवताओं के लिए समस्या पैदा करने वाली अनेक कथाएं मिलती हैं। उत्तर भारत में "करवा-चौथ" पर गणेश पूजा अखंड सौभाग्य के लिए की जाती है। साथ ही दादी-नानी के मुंह से चुटुक विनायक की कथा भी सुनने को मिलती है, जिसमें विनायक गणेश निर्धन बुढि़या का घर धन सम्पदा से भर देते हैं। घर की ब़डी बूढि़यों के झुर्री भरे चेहरों पर, यह कथा को सुनाते समय जो चमक आती है और इसके अन्त में जो आशीर्वचन- जैसे इसके दिन फिरे- वैसे सबके दिन फिरे- वो देती हैं, उसका आनन्द गूंगे के गु़ड के समान है। पुन: दीपावली पर लक्ष्मी-गणेश के पूजन से ही पर्व की शुरूआत होती है। व्यापारी वर्ग विशेष रूप से अपने आने वाले वित्तीय वर्ष में समृद्धि की कामना से मां महालक्ष्मी के साथ गंगाजल की पूजा करते हैं। महाराष्ट्र में गणपति पूजन के समय जनमानस का उत्साह देखते ही बनता है। राष्ट्र 1857 के प्रथम स्वतंत्रता संग्राम की असफलता के बाद घोर अवसाद में था, तब लोकमान्य बालगंगाधर तिलक ने सन 1892/93 में पहले गणपति पूजन और फिर शिवाजी जयन्ती को सार्वजनिक उत्सव के रूप मनाना आरम्भ किया। श्रीगणेश जनमानस के देवता थे। उनके पूजन के नाम पर जनता में उत्साह जाग्रत हुआ तथा उसे ही तिलकजी ने राष्ट्रीय आंदोलन की मुख्य धारा से जो़ड दिया। ब्रिटिश सरकार की नजरों से बचकर यह जन जागरण का सैलाब श्री गणेश के कारण ही उम़डा और अंतत: भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन के इतिहास का महत्वपूर्ण अंग बन गया। आज भी गरीबी, बाढ़, भी़ड, बेरोजगारी आदि समस्याओं के बीच लेजिम और ढोल की थाप पर नाचते हुए मुम्बईकर गणेशमय हो जाते हैं और दस दिन तक सभी लौकिक चिंताओं से दूर हो जाते हैं।
यह गणेशजी का ही प्रभाव है कि सम्पूर्ण महाराष्ट्र, विशेष रूप से मुम्बई धर्म सम्प्रदाय, जाति, भाषा और क्षेत्र की विविधताओं से ऊपर उठकर "गणपति बप्पा" के स्वागत सत्कार में लग जाता है। गणपति बप्पा मोरिया- आला अरसी सावडिया के नारों से गणपति की विदाई भी कुछ कम मार्मिक नहीं होती। भूख-प्यास, आधि-व्याधि, गरीबी-परेशानी सब भूलकर लोग दस दिन के लिए श्रीगणपति की आराधना में समाधिस्थ हो जाते हैं। निश्चय ही श्रीगणेश से अधिक लोकमानस को प्रभावित करने वाला कोई देवता नहीं है। मुम्बई में लाल बाग के बादशाह की विशेष महत्ता है। साथ ही सिद्धि विनायक तो विराजमान हैं ही।
कभी आप इस बात पर ध्यान दें कि श्री अमरनाथजी की पवित्र गुफा से लेकर रामनरेश महादेव तथा मां कामाख्या देवी से लेकर सोमनाथजी तक प्रत्येक मंदिर में प्रवेश से पूर्व श्री गणेश विराजमान रहते हैं। श्रद्धालु को जब गणेशजी के दर्शन होते हैं तो अपने आराध्य देव के दर्शन की आशा से उसका मन उल्फुल्लित हो जाता है और अपनी सारी थकान भूल जाता है। ऎसी महिमा गजानन की है इसीलिए चाहे मोतीडूंगरी के गणेश हों या मुम्बई के सिद्धि विनायक अथवा देश में स्थापित गणेशजी की अन्य सिद्ध पीठ, सदैव से ही भक्तों की कामनाओं को पूर्ण करने के कारण भक्तजनों की श्रद्धा का केन्द्र बने रहते हैं।
मां पार्वती तथा देवाधिदेव महादेव के प्रिय पुत्र श्रीगणेश की कृपा के बिना कोई कार्य सिद्ध नहीं होता इसीलिए पूजन के अंत मे आशीर्वचन के रूप मे पंडित जी यह मंगल कामना करते हैं कि "यान्तु देवगणा: सर्वे।" अर्थात् सभी देवी देवता, जिन्हें पूजन के लिए आमंत्रित किया गया था, अपने-अपने स्थानों को पधारें तथा मंगल कार्य होने पर उन्हें फिर बुलाया जाएगा परन्तु लक्ष्मी-गणेश एवं ऋद्धि-सिद्धि यहीं विराजमान रहें। स्पष्ट है कि माता लक्ष्मी और श्रीगणेश अपनी सहधर्मिणी ऋद्धि-सिद्धि के साथ जब कृपा करते हैं तभी मानव का लौकिक तथा परलौकिक जीवन सफल हो पाता है। श्रीगणेश की महिमा को लिपिबद्ध करने में मेरी अल्पबुद्धि स्वयं को असमर्थ पाती है अत: इस निवेदन के साथ कि श्रीगणेशजी सभी का कल्याण करें- लेखनी को विराम दे रही हू ।

ब्लॉगर के लिए लोकप्रिय एनीमेशन विजेट

सीमा खान : पेश है ब्लॉगर के लिए लोकप्रिय एनीमेशन  विजेट इस में  एनीमेशन का उपयोग किया गया है इस विजेट को बहुत आसानी से तीन कदमो में अपने ब्लॉग पर लगाया जा सकता है.
इस बिजेट  को ब्लॉग पर लाने के लिए नीचे बताई प्रक्रिया देखे Blogger

Layout
View Image in New Window
* (यदि आप पहले से ही इस गैजेट का प्रयोग कर रहे है तो  इस कदम को छोड़ दे )
    * के बाद आप लोकप्रिय पोस्ट गैजेट "गैजेट जोड़ें"और फिर "HTML / Javascript" का चयन करें
    * एचटीएमएल / जावास्क्रिप्ट गैजेट के "सामग्री" के लिए सभी स्क्रिप्ट में बॉक्स में रखे .
View Image in New Window



अब नीचे दिया कोड खुले बॉक्स में डाले 

<style type="text/css" media="screen">

#PopularPosts1 {
 overflow:hidden;
margin-top:5px;
padding:0px 0px;
height:400px;

}

#PopularPosts1 ul {
width:220px;
overflow:hidden;
list-style-type: none;
padding: 0px 0px;
margin:0px 0px;
}

#PopularPosts1 li {
 width:208px;
padding: 5px 5px;
margin:0px 0px 5px 0px;
list-style-type:none;
float:none;
height:80px;
overflow: hidden;
background:#fff url(http://i879.photobucket.com/albums/ab351/bloggerblogimage/blogger/post.jpg) repeat-x;
border:1px solid #ddd;
}

#PopularPosts1 li .item-title {
    color:#A5A9AB;
    font-size:1em;
    margin-bottom:0.5em;
}

#PopularPosts1 li .item-title a {
 text-decoration:none;
color:#4B545B;
font-size:11px;
height:18px;
overflow:hidden;
margin:0px 0px;
padding:0px 0px 2px 0px;
}

#PopularPosts1 li img {
 float:left;
margin-right:5px;
background:#EFEFEF;
border:0;
}

#PopularPosts1 li .item-snippet {
  overflow:hidden;
font-family:Tahoma,Arial,verdana, sans-serif;
font-size:10px;
color:#262B2F;
padding:0px 0px;
margin:0px 0px;
}

#PopularPosts1 .item-snippet a,
#PopularPosts1 .item-snippet a:visited {
    color:#3E4548;
    text-decoration: none;
}

#PopularPosts1 .spyWrapper {
    height: 100%;
    overflow: hidden;
    position: relative;
}

#PopularPosts1 {
	-webkit-border-radius: 5px;
	-moz-border-radius: 5px;
}

.tags span,
.tags a {
	-webkit-border-radius: 8px;
	-moz-border-radius: 8px;
}

a img {
    border: 0;
}

-->
</style>
<script src="http://ajax.googleapis.com/ajax/libs/jquery/1.6.2/jquery.min.js" type="text/javascript"></script>
<script type="text/javascript" charset="utf-8">
$(function () {
    $('.popular-posts ul').simpleSpy();
});
</script>
<script src="http://dl.dropbox.com/u/37128917/simplespy.js" type="text/javascript"></script>




 अब परिवर्तन को सेब कर दे

एप्पल को टक्कर देने के लिए सोनी ने उठाया कदम!

By सीमा खान
टैबलेट कंप्यूटर के बाजार में एप्प्ल और सैमसंग जैसे बड़े खिलाड़ियों को टक्कर देने के लिए अब सोनी ने भी अपना नया टैबलेट कंप्यूटर- ‘टेबलेट एस’ पेश कर दिया है। इसके जरिए कंपनी एप्पल के आईपैड 2 और सैमसंग टैब को चुनौती देगी

सोनी टैबलेट एस में डब्ल्यूएक्सजीए टेक्नोलॉजी से लैस, 9.4 इंच का स्क्रीन लगा हुआ है। ऑपरेटिंग सिस्टम के तौर पर इसमें हनीकॉम्ब 3.1 का इस्तेमाल किया गया है। साथ ही इसमें 1 गीगाहर्ट्ज के टैगरा 2 जैसे दमदार प्रोसेसर को लगाया गया है। अन्य फीचर्स की बात की जाए तो इसमें वाई फाई, इन्फ्रा रेड, ब्लूटुथ, डिजिटल कंपास और लाइट सेंसर जैसे एडवांस फीचर को शामिल किया गया है।


ग्राहकों के लिए सोनी का यह टैबलेट 16 जीबी और 32 जीबी की मैमोरी विकल्प के साथ उपलब्ध होगा। इसका वजन मात्र 598 ग्राम है, यानी यह एप्पल के आईपैड 2 के मुकाबले हल्का है। कंपनी की तरफ से यह दावा भी किया जा रहा है कि एक बार चार्ज करने के बाद इसे 8 घंटे तक इस्तेमाल किया जा सकता है, यानी इसका बैट्री बैक-अप भी काफी अच्छा है।


लेकिन जानकार सोनी के इस नए प्रोडक्ट को आईपैड 2 के लिए बहुत बड़ी चुनौती की तरह नहीं देख रहे हैं।


सोनी टैबलेट एस की प्री-बुकिंग शुरू की जा चुकी है। इसके 16 जीबी मैमोरी वाले मॉडल की कीमत 500 डॉलर यानी करीब 22500 रुपए रखी गई है। कंपनी की तरफ से सितंबर महीने के मध्य तक इसकी शिपिंग शुरू कर दी जाएगी।

मासिक किस्तों में खरीदिए सोना आइये जाने !

सोने की तस्वीर :- दुनिया में भारत सबसे बड़ा सोना उपभोक्ता देश है लेकिन उत्पादन में चीन सबसे आगे है। वर्ष 2010 में चीन में 340 टन सोने का उत्पादन हुआ। विश्व के कुल उत्पादन में चीन की हिस्सेदारी करीब 13 फीसदी है। विश्व में वर्ष 2010 में कुल करीब 2615 टन सोने का उत्पादन हुआ। चालू वर्ष की दूसरी तिमाही (अप्रैल-जून) के दौरान सोने की सप्लाई व मांग की तस्वीर।

1058.7 टन सोने की कुल सप्लाई रही सोने की। जबकि पिछले साल समान अवधि में 1108 टन सप्लाई हुई थी।
708 टन सोने की सप्लाई खदानों से हुई। पिछले साल इस अवधि में 659 टन सोने की सप्लाई हुई थी।
429.3 टन पर रही पुराने सोने की सप्लाई। पिछले साल इस अवधि में 444.3 टन पुराने सोने की सप्लाई हुई थी।

918.8 टन रही सोने की कुल मांग। पिछले साल दूसरी तिमाही में मांग 1107 टन मांग रही थी। इस तरह मांग में कमी आई।
44.5 अरब डॉलर मूल्य के सोने की मांग रही इस दौरान। पिछले साल इस अवधि में बिके सोने का मूल्य 42.6 अरब डॉलर रहा था।
55 फीसदी सोने की मांग निवेश के लिए रही। निवेश के लिए सोना खरीद 574.2 टन से घटकर 359.4 टन रह गया।

38 फीसदी ज्यादा मांग रही भारत में सोने की पिछले साल की समान अवधि के मुकाबले
25 फीसदी ज्यादा मांग रही चीन में सोने की पिछले साल की समान अवधि के मुकाबले
307.7 टन सोने की मांग रही सोने की छड़ और सिक्के बनाने के लिए। पिछले साल समान अवधि में 282.6 टन सोने की मांग रही थी।
52 फीसदी मांग सिर्फ भारत और चीन से ही रही।


117.9 टन सोने की मांग टेक्नालॉजी के लिए रही। पिछले साल मांग 116.7 टन रही थी।
69.4 टन सोने की खरीद की विभिन्न देशों के केंद्रीय बैंकों ने
442.5 टन सोने की मांग ज्वैलरी के लिए रही। पिछले साल समान अवधि में 416 टन सोने की मांग ज्वैलरी के लिए रही थी।
26 फीसदी कीमत बढ़ गई सोने की आलोच्य अवधि के दौरान

बेटी की शादी या जन्मदिन पर आप सोने के गहने उपहार में देना तो चाहते हैं लेकिन कीमत सुनकर आपके कदम ठिठक जाते हैं। लेकिन अब इसका भी विकल्प है। ग्राहकों को सोना खरीदने में आसानी हो, इसके लिए कई ज्वैलर्स ने मासिक बचत योजना शुरू की है। यह योजना काफी हद तक बैंकों की जमा योजनाओं की तरह ही होती है।


तनिष्क के वाइस प्रेसिडेंट (रिटेल एवं मार्केटिंग) संदीप कुलहाली ने बताया कि सोने की ऊंची कीमतों का भार ग्राहक की जेब पर एकदम से ना पड़े इसके लिए हम 24 महीने की स्कीम लेकर आ रहे हैं। इसमें ग्राहक को हर महीने राशि जमा करानी होती है। जिस दिन ग्राहक पैसे जमा कराता है उस दिन ग्राहक के खाते में, उसी दिन के बाजार भाव के आधार पर सोना की मात्रा जमा हो जाती है।

इस तरह ग्राहक 24 महीने में जमा की गई किस्तों के आधार पर आखिर में उस सोने के बराबर गहनों की खरीद कर सकता है। इससे ग्राहक की बचत तो हो ही जाती है साथ में उसकी जेब पर भार भी कम पड़ता है। उन्होंने बताया कि तनिष्क के सभी स्टोर्स पर एक सितंबर से ये स्कीम चालू हो जायेगी।


 पीसी ज्वैलर्स के मैनेजिंग डायरेक्टर बलराम गर्ग ने बताया कि हमने ग्राहकों को जोडऩे के लिए 12 महीने की किस्तों की स्कीम चला रखी है। इसमें ग्राहक के लिए आखिरी या पहली किस्त जमा करने की तारीख के भाव पर सोने की खरीद करने का विकल्प है।

ग्राहक को 12 किस्तें देनी होती हैं और दो किस्त हम जमा कराते हैं जो बोनस होता है। इस तरह से ग्राहक सोने की कीमतों में चल रही उठापटक के जोखिम से बच जाता है। इसमें ग्राहक को पैसा वापस नहीं मिलता, उसे कुल रकम की ज्वैलरी खरीदनी होती है।


दिल्ली बुलियन वैलफेयर एसोसिएशन के अध्यक्ष वीके गोयल ने बताया कि सोने की कीमतों में रिकार्ड तेजी बनी हुई है। इसलिए ज्वैलर्स ग्राहकों को जोडऩे के लिए स्कीमों का सहारा ले रहे हैं। ऐसी स्कीमों में ग्राहक को कुल रकम के बराबर ज्वैलरी ही खरीदनी होती है। अगर किसी कारणवश किस्त के भुगतान में देरी हो जाये तो परिपक्वता की तारीख बढ़ जाती है। अगर आप स्कीम को जल्द खत्म करना चाहते है तो ज्वैलर्स द्वारा दिया जाने वाला बोनस आपको नहीं मिलेगा।


मुंबई स्थित फाइनेंशियल एडवाइजरी फर्म ट्रांसेंड इंडिया कंसल्टिंग के डायरेक्टर कार्तिक झावेरी इस कंसेप्ट को अच्छा बताते हुए कहते हैं कि छोटे-बड़े सभी प्रकार के ज्वैलर ऐसी स्कीम चलाते हैं। इससे लोग थोड़ा-थोड़ा पैसा ज्वैलर के यहां जमा करवाते हुए एक खास अवधि के बाद भौतिक रूप से सोना या सोने के गहने ले सकते हैं। यह स्कीम ग्राहक और ज्वैलर दोनों के नजरिये से अच्छी है।

ग्राहक छोटी राशि जमा करवाते हुए एक निश्चित अवधि के बाद सोने की भौतिक डिलीवरी पाता है तो ज्वैलर को भी नकदी की समस्या नहीं रहती है। ज्वैलर ग्राहक के इन पैसों पर ब्याज अर्जित करता है। हालांकि झावेरी का सुझाव है कि बड़े और जाने-माने ज्वैलर की स्कीम में ही भागीदारी करनी चाहिए क्योंकि उनमें ठगे जाने की संभावना काफी कम होती है।

मुंबई स्थित फाइनेंशियल प्लानिंग फर्म फिन केयर कंसल्टिंग के चीफ कोच और सर्टिफायड फाइनेंशियल प्लानर अर्णव पंड्या कहते हैं कि ऐसी योजनाओं में हिस्सा लेने में कोई बुराई नहीं है बशर्ते ज्वैलर प्रतिष्ठित हो। छोटे ज्वैलर की ऐसी योजनाओं में जोखिम अधिक होता है। हो सकता है कि वह समय पर भौतिक सोने की डिलीवरी न कर पाएं।

दूसरी तरफ, अधिकांश बड़े ज्वैलर ग्राहकों को एक सर्टिफिकेट देते हैं जिसमें यह स्पष्ट रूप से लिखा होता है कि सोना कितने कैरेट का होगा और उसकी डिलीवरी कब की जाएगी। तमाम शर्तों की जानकारी ज्वैलर ऐसे सर्टिफिकेट में देते हैं। इसके अतिरिक्त वह पास बुक जैसी व्यवस्था भी ग्राहकों के लिए करते हैं जिसमें ग्राहक के पैसे जमा करने की तारीख, राशि और उसके अनुसार सोने की मात्रा का विवरण होता है।

कैसे चलती है ईएमआई स्कीम

बैंक जमा खाते की तरह आप किसी ज्वैलर के यहां खाता खुलवाइए
इसकी अवधि निश्चित होती है, जैसे 12 माह या 24 माह के लिए
खाता खोलने के साथ ज्वैलर आपको एक पासबुक भी दे सकता है
जिस दिन आप पैसे जमा करते हैं, उस दिन के भाव से ज्वैलर आपके लिए सोना खरीदता है
 स्कीम पूरी होने के बाद पूरी रकम के बराबर ज्वैलरी ले सकते हैं
 स्कीम पूरी होने के बाद पूरी रकम के बराबर ज्वैलरी ले सकते हैं

 क्या हैं फायदे
 सोना महंगा होने से एक बार में गहना खरीदना मुश्किल है। पर किस्त में खरीदना आसान है।

सावधानी जरूरी
बड़े ज्वैलर्स की स्कीम में ही भागीदारी करनी चाहिए क्योंकि उनमें ठगी की आशंका कम होती है।
(सीमा खान)

भारत की निगाहें तेंडुलकर और द्रविड़ पर

सीमा खान ।। भारत तीन सितंबर को चेस्टर ली स्ट्रीट के रिवरसाइड ग्राउंड में इंग्लैंड के खिलाफ जब पांच वनडे मैचों की क्रिकेट सीरीज का पहला मैच खेलेगा। भारत जब इस मैच में उतरेगा तो विजयी शुरूआत के लिए उसकी निगाहें सचिन तेंडुलकर और राहुल द्रविड़ की अनुभवी जोड़ी पर टिकी होंगी। भारत की टीम इंग्लैंड से चार टेस्ट मैचों की क्रिकेट सीरीज 0-4 की हार गई थी।

तेंडुलकर और द्रविड़ दिखा चुके हैं दम
भारत की मौजूदा टीम में केवल तेंडुलकर और द्रविड़ को ही इस मैदान पर खेले हैं जबकि उसके अन्य खिलाड़ी पहली बार इस मैदान पर उतरेंगे। भारत ने इस मैदान पर अब तक केवल एक वनडे मैच खेला है और इंग्लैंड के खिलाफ खेला गया यह मैच भी बारिश की भेंट चढ़ गया था, लेकिन तेंडुलकर और द्रविड़ इस मैच में अच्छी परियां खेलने में सफल रहे थे। भारत को इस अनुभवी जोड़ी से एक बार फिर अच्छे प्रदर्शन की उम्मीद होगी।

आसान नहीं होगी भारत की राह
इंग्लैंड के खिलाफ हालांकि भारत की जीत की राह आसान नहीं होगी। इंग्लैंड की टीम ने इस मैदान पर अपने पिछले तीनों वनडे मैच जीते हैं। उसका हालांकि ओवरऑल रेकॉर्ड यहां बहुत अच्छा नहीं है। इंग्लैंड ने इस मैदान पर आठ मैच खेले हैं, जिसमें से चार में उसे जीत और तीन में हार मिली जबकि भारत के खिलाफ उसका एक मैच बारिश की भेंट चढ़ गया था।

भारत दे चुका है इंग्लैंड को कड़ी टक्कर
भारत ने हालांकि इंग्लैंड के खिलाफ इस मैदान पर अपने एकमात्र मैच में मेजबान टीम को कड़ी टक्कर दी थी लेकिन बारिश ने मजा किरकिरा कर दिया। भारत ने चार जुलाई 2002 को हुए इस मैच में टॉस जीतकर पहले बल्लेबाजी करते हुए तीन विकेट 52 रन पर गंवा दिए थे लेकिन तेंडुलकर (नॉटआउट 105) और द्रविड़ (82) ने इसके बाद तीसरे विकेट के लिए 169 रन जोड़कर टीम का स्कोर चार विकेट पर 285 रन तक पहुंचा दिया। इंग्लैंड की टीम ने इसके जवाब में जब एक विकेट पर 53 रन बनाये थे तब बारिश आ गई और मैच रद्द करना पड़ा।

धोनी की उम्मीदें तेंडुलकर पर टिकीं
महेंद्र सिंह धोनी की अगुवाई वाली टीम को उम्मीद होगी तेंडुलकर इस मैदान में एक बार फिर शतक जड़ते हुए इंटरनैशनल क्रिकेट में शतकों का शतक पूरा करने के अलावा टीम को जीत दिलाने में सफल रहेंगे। इस सीरीज के बाद वन डे क्रिकेट को अलविदा कहने वाले द्रविड़ ने टेस्ट सीरीज के चार मैचों में सर्वाधिक तीन शतक जड़े और टीम को अगर जीत के साथ शुरूआत करनी है तो उन्हें अपनी इस फॉर्म को आगे भी जारी रखना होगा।

रैना की ढीली फॉर्म है चिंता
भारत के बल्लेबाजों में विराट कोहली, रोहित शर्मा और पार्थिव पटेल अच्छी लय में हैं लेकिन सुरेश रैना और कप्तान धोनी की फॉर्म टीम के लिए चिंता का सबब है, जिन्हें रन बनाने के लिए जूझना पड़ रहा है। टीम इंडिया इस सीरीज में चोट के कारण वीरेंद्र सहवाग, युवराज सिंह, गौतम गंभीर, हरभजन सिंह और जहीर खान जैसे अनुभवी खिलाडि़यों के बिना उतर रही है, जिन्होंने पांच महीने पहले टीम को वर्ल्ड चैंपियन बनाने में अहम भूमिका निभाई थी।

रंग में हैं इंग्लैंड के बल्लेबाज
दूसरी ओर इंग्लैंड के लगभग सभी बल्लेबाज और गेंदबाज अच्छे रंग में हैं और कप्तान एलिस्टर कुक की अगुवाई में वह वनडे सीरीज में भी भारत को मात देने के इरादे से उतरेंगे।

Thursday, September 1, 2011

मूवी रिव्यू: बॉडीगार्ड

मूवी :बॉडीगार्ड
  By   सीमा खान 
Viewer Rating: 

Critic Rating:
(3/5)
Star Cast:
सलमान खान,करीना कपूर एंड राज बब्बर
Director:
सिद्दीक
Producer:
अतुल अग्निहोत्री और अलविरा अग्निहोत्री
Music Director:
हिमेश रेशमिया और प्रीतम चक्रबर्ती
Genre:
रोमांटिक कॉमेडी
कहानी : एक दक्षिण भारतीय फिल्म उठाइए। सलमान खान को लीजिए। कुछ एक्शन डालिए। कुछ मसाला भरिए। करीना जैसी एक बिकाऊ अभिनेत्री को भी इस पैकेज में शामिल कीजिए। इसमें हल्की-फुल्की कॉमेडी का तड़का लगाइए जो सुपरहिट डिश बाहर आएगी वो बॉडीगार्ड ही हो सकती है। जी हां इनदिनों यही फॉर्मूला हिट है। और बॉलीवुड इस हिट फॉर्मूले का इस्तेमाल आंखें बंद करके करता है। भले ही कई जगह डिश बेस्वाद या एकरस लगने लगे। ईद पर रिलीज हुई बॉडीगार्ड भी वांटेड, दबंग, रेडी की तर्ज पर साउथ की रिमेक है। जिसे सलमान के दमदार कंधे पर रखकर पेश किया गया है।
फिल्म की कहानी लवली सिंह(सलमान) के इर्द-गिर्द घूमती है। लवली बॉडीगार्ड है। उसे एक बड़े बिजनेसमैन सरताज राणा(राज बब्बर) अपनी बेटी दिव्या (करीना) की रक्षा के लिए नियुक्त करता है। करीना को बॉडीगार्ड बिलकुल रास नहीं आता और वह उसका ध्यान भटकाने के लिए एक प्राइवेट नंबर का इस्तेमाल कर उसे चाहने वाली लड़की का नाटक करती है। लवली को भी फ़ोन पर बात करने वाली इस लड़की से प्यार हो जाता है। ट्विस्ट तब आता है जब उसे मालूम पड़ता है कि फ़ोन पर उससे बात करने वाली लड़की कोई और नहीं बल्कि दिव्या ही है।

स्टोरी ट्रीटमेंट -भागम भाग और हलचल जैसी फिल्मों की स्क्रिप्ट लिख चुके मलयाली निर्देशक सिद्दीक की इस फिल्म में भी दक्षिण का टच साफ़ नजर आता है। जिसमें उन्होंने विशुद्ध बॉलीवुड मसाले भरे हैं। फिल्म का पहला हिस्सा काफी धीमा है और बेवजह खींचा गया है मगर दूसरा भाग अपनी रफ़्तार पकड़ते ही दिलचस्प हो जाता है। फिल्म में सलमान बहुत ही मासूम दिखाई दिए हैं। करीना के साथ उनकी जबर्दस्त केमिस्ट्री दिखाई देती है।

स्टार कास्ट -एक्शन, कॉमेडी और रोमांस से भरपूर इस फिल्म में सलमान ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि वह बॉक्स ऑफिस पर क्यों हिट हैं। उनकी जबरदस्त कॉमिक टाइमिंग और दमदार बॉडी ने लवली सिंह के किरदार में जान फूंक दी है। जब वी मेट में गीत के किरदार के बाद करीना ने दिव्या के रोल से एक बार फिर साबित कर दिया है कि संवेदनशील अभिनेत्री के तौर पर वे बड़ी संभावना हैं। उनके अलावा हेज़ल कीच, आदित्य पंचोली, राज बब्बर और महेश मांजरेकर ने अपने किरदार के साथ पूरा न्याय किया है।

निर्देशन -सिद्दीक की कॉमेडी सींस फिल्माने की टाइमिंग गजब है। जिसके पीछे उनके अपने करियर के शुरुआती दिनों में मिमिक्री करने की कला का काफी योगदान है। उन्होंने मलयालम और तमिल में भी इसी कहानी पर फिल्म बनाई है। यही वजह है की सटीक निर्देशन की वजह से फिल्म के हलके-फुल्के दृश्य भी आपको बोर करते नहीं लगते हैं। ऐसा माना जा सकता है कि प्रियदर्शन के बाद सिद्दीक के रूप में दक्षिण से बॉलीवुड को एक और बढ़िया निर्देशक मिल गया है।

डायलॉग/सिनेमेटोग्राफी/म्यूजिक -फिल्म का म्यूजिक पहले से ही धूम मचाए हुए है। हिमेश रेशमिया ने इस फिल्म से फिर संगीत निर्देशन में वापसी की है। हालांकि प्रीतम ने भी एक गाना आई लव यू कम्पोज किया है जो युवाओं के बीच खासा लोकप्रिय हो चुका है। इसके अलावा सलमान का डायलॉग मुझपे एक अहसान करना की मुझपर कोई अहसान न करना..भी काफी पंचिंग है।

क्यों देखें -यदि आप दंबग-वांटेड-रेडी सीरिज के सलमान के फैन हैं और फैमिली इंटरटेनिंग फिल्मों के शौकीन हैं तो सलमान-करीना की केमिस्ट्री से सजी यह फिल्म इस सप्ताह आपके लिए अच्छा मनोरंजन साबित हो सकती है।

अन्ना के गांव रालेगण सिद्धि की पांच तस्वीरें, देखिए

By सीमा खान
 

रालेगण सिद्धि (अहमदनगर). अन्ना हजारे को बुधवार शाम को गुड़गांव के मेदांता अस्पताल से छुट्टी दे दी गई। रात करीब सवा 11 बजे वे दिल्ली से पुणे पहुंचे अन्ना देर रात 1 बजे अपने गांव रालेगण सिद्धि पहुंच गए।
वहां बड़ी संख्या में समर्थकों ने उनका स्वागत किया। अन्ना से मिलने वालों का तांता लगा हुआ है। रालेगण सिद्धि पहुंचकर अन्ना जिस गेस्ट हाउस में रुके हैं उसकी कुछ तस्वीरें...