सोने की तस्वीर :- दुनिया में भारत सबसे बड़ा सोना उपभोक्ता देश है लेकिन उत्पादन में चीन सबसे आगे है। वर्ष 2010 में चीन में 340 टन सोने का उत्पादन हुआ। विश्व के कुल उत्पादन में चीन की हिस्सेदारी करीब 13 फीसदी है। विश्व में वर्ष 2010 में कुल करीब 2615 टन सोने का उत्पादन हुआ। चालू वर्ष की दूसरी तिमाही (अप्रैल-जून) के दौरान सोने की सप्लाई व मांग की तस्वीर।1058.7 टन सोने की कुल सप्लाई रही सोने की। जबकि पिछले साल समान अवधि में 1108 टन सप्लाई हुई थी।
708 टन सोने की सप्लाई खदानों से हुई। पिछले साल इस अवधि में 659 टन सोने की सप्लाई हुई थी।
429.3 टन पर रही पुराने सोने की सप्लाई। पिछले साल इस अवधि में 444.3 टन पुराने सोने की सप्लाई हुई थी।
918.8 टन रही सोने की कुल मांग। पिछले साल दूसरी तिमाही में मांग 1107 टन मांग रही थी। इस तरह मांग में कमी आई।
44.5 अरब डॉलर मूल्य के सोने की मांग रही इस दौरान। पिछले साल इस अवधि में बिके सोने का मूल्य 42.6 अरब डॉलर रहा था।
55 फीसदी सोने की मांग निवेश के लिए रही। निवेश के लिए सोना खरीद 574.2 टन से घटकर 359.4 टन रह गया।
38 फीसदी ज्यादा मांग रही भारत में सोने की पिछले साल की समान अवधि के मुकाबले
25 फीसदी ज्यादा मांग रही चीन में सोने की पिछले साल की समान अवधि के मुकाबले
307.7 टन सोने की मांग रही सोने की छड़ और सिक्के बनाने के लिए। पिछले साल समान अवधि में 282.6 टन सोने की मांग रही थी।
52 फीसदी मांग सिर्फ भारत और चीन से ही रही।
117.9 टन सोने की मांग टेक्नालॉजी के लिए रही। पिछले साल मांग 116.7 टन रही थी।
69.4 टन सोने की खरीद की विभिन्न देशों के केंद्रीय बैंकों ने
442.5 टन सोने की मांग ज्वैलरी के लिए रही। पिछले साल समान अवधि में 416 टन सोने की मांग ज्वैलरी के लिए रही थी।
26 फीसदी कीमत बढ़ गई सोने की आलोच्य अवधि के दौरान
बेटी की शादी या जन्मदिन पर आप सोने के गहने उपहार में देना तो चाहते हैं लेकिन कीमत सुनकर आपके कदम ठिठक जाते हैं। लेकिन अब इसका भी विकल्प है। ग्राहकों को सोना खरीदने में आसानी हो, इसके लिए कई ज्वैलर्स ने मासिक बचत योजना शुरू की है। यह योजना काफी हद तक बैंकों की जमा योजनाओं की तरह ही होती है।
तनिष्क के वाइस प्रेसिडेंट (रिटेल एवं मार्केटिंग) संदीप कुलहाली ने बताया कि सोने की ऊंची कीमतों का भार ग्राहक की जेब पर एकदम से ना पड़े इसके लिए हम 24 महीने की स्कीम लेकर आ रहे हैं। इसमें ग्राहक को हर महीने राशि जमा करानी होती है। जिस दिन ग्राहक पैसे जमा कराता है उस दिन ग्राहक के खाते में, उसी दिन के बाजार भाव के आधार पर सोना की मात्रा जमा हो जाती है।
इस तरह ग्राहक 24 महीने में जमा की गई किस्तों के आधार पर आखिर में उस सोने के बराबर गहनों की खरीद कर सकता है। इससे ग्राहक की बचत तो हो ही जाती है साथ में उसकी जेब पर भार भी कम पड़ता है। उन्होंने बताया कि तनिष्क के सभी स्टोर्स पर एक सितंबर से ये स्कीम चालू हो जायेगी।
पीसी ज्वैलर्स के मैनेजिंग डायरेक्टर बलराम गर्ग ने बताया कि हमने ग्राहकों को जोडऩे के लिए 12 महीने की किस्तों की स्कीम चला रखी है। इसमें ग्राहक के लिए आखिरी या पहली किस्त जमा करने की तारीख के भाव पर सोने की खरीद करने का विकल्प है।
ग्राहक को 12 किस्तें देनी होती हैं और दो किस्त हम जमा कराते हैं जो बोनस होता है। इस तरह से ग्राहक सोने की कीमतों में चल रही उठापटक के जोखिम से बच जाता है। इसमें ग्राहक को पैसा वापस नहीं मिलता, उसे कुल रकम की ज्वैलरी खरीदनी होती है।
दिल्ली बुलियन वैलफेयर एसोसिएशन के अध्यक्ष वीके गोयल ने बताया कि सोने की कीमतों में रिकार्ड तेजी बनी हुई है। इसलिए ज्वैलर्स ग्राहकों को जोडऩे के लिए स्कीमों का सहारा ले रहे हैं। ऐसी स्कीमों में ग्राहक को कुल रकम के बराबर ज्वैलरी ही खरीदनी होती है। अगर किसी कारणवश किस्त के भुगतान में देरी हो जाये तो परिपक्वता की तारीख बढ़ जाती है। अगर आप स्कीम को जल्द खत्म करना चाहते है तो ज्वैलर्स द्वारा दिया जाने वाला बोनस आपको नहीं मिलेगा।
मुंबई स्थित फाइनेंशियल एडवाइजरी फर्म ट्रांसेंड इंडिया कंसल्टिंग के डायरेक्टर कार्तिक झावेरी इस कंसेप्ट को अच्छा बताते हुए कहते हैं कि छोटे-बड़े सभी प्रकार के ज्वैलर ऐसी स्कीम चलाते हैं। इससे लोग थोड़ा-थोड़ा पैसा ज्वैलर के यहां जमा करवाते हुए एक खास अवधि के बाद भौतिक रूप से सोना या सोने के गहने ले सकते हैं। यह स्कीम ग्राहक और ज्वैलर दोनों के नजरिये से अच्छी है।
ग्राहक छोटी राशि जमा करवाते हुए एक निश्चित अवधि के बाद सोने की भौतिक डिलीवरी पाता है तो ज्वैलर को भी नकदी की समस्या नहीं रहती है। ज्वैलर ग्राहक के इन पैसों पर ब्याज अर्जित करता है। हालांकि झावेरी का सुझाव है कि बड़े और जाने-माने ज्वैलर की स्कीम में ही भागीदारी करनी चाहिए क्योंकि उनमें ठगे जाने की संभावना काफी कम होती है।
मुंबई स्थित फाइनेंशियल प्लानिंग फर्म फिन केयर कंसल्टिंग के चीफ कोच और सर्टिफायड फाइनेंशियल प्लानर अर्णव पंड्या कहते हैं कि ऐसी योजनाओं में हिस्सा लेने में कोई बुराई नहीं है बशर्ते ज्वैलर प्रतिष्ठित हो। छोटे ज्वैलर की ऐसी योजनाओं में जोखिम अधिक होता है। हो सकता है कि वह समय पर भौतिक सोने की डिलीवरी न कर पाएं।
दूसरी तरफ, अधिकांश बड़े ज्वैलर ग्राहकों को एक सर्टिफिकेट देते हैं जिसमें यह स्पष्ट रूप से लिखा होता है कि सोना कितने कैरेट का होगा और उसकी डिलीवरी कब की जाएगी। तमाम शर्तों की जानकारी ज्वैलर ऐसे सर्टिफिकेट में देते हैं। इसके अतिरिक्त वह पास बुक जैसी व्यवस्था भी ग्राहकों के लिए करते हैं जिसमें ग्राहक के पैसे जमा करने की तारीख, राशि और उसके अनुसार सोने की मात्रा का विवरण होता है।
कैसे चलती है ईएमआई स्कीम
बैंक जमा खाते की तरह आप किसी ज्वैलर के यहां खाता खुलवाइए
इसकी अवधि निश्चित होती है, जैसे 12 माह या 24 माह के लिए
खाता खोलने के साथ ज्वैलर आपको एक पासबुक भी दे सकता है
जिस दिन आप पैसे जमा करते हैं, उस दिन के भाव से ज्वैलर आपके लिए सोना खरीदता है
स्कीम पूरी होने के बाद पूरी रकम के बराबर ज्वैलरी ले सकते हैं
स्कीम पूरी होने के बाद पूरी रकम के बराबर ज्वैलरी ले सकते हैं
क्या हैं फायदे
सोना महंगा होने से एक बार में गहना खरीदना मुश्किल है। पर किस्त में खरीदना आसान है।
सावधानी जरूरी
बड़े ज्वैलर्स की स्कीम में ही भागीदारी करनी चाहिए क्योंकि उनमें ठगी की आशंका कम होती है।
(सीमा खान)




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